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IPO बाजार में आने वाली है बहार: 145 कंपनियों को SEBI की मंजूरी, जियो, जेप्टो, ओयो कतार में

शेयर बाजार में IPO की कतार लंबी है। SEBI से 145 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनका कुल आकार करीब 2.75 लाख करोड़ रुपये है। सबसे बड़ा प्रस्तावित IPO जियो प्लेटफॉर्म्स का करीब 35,000 करोड़ रुपये का है। सितंबर में 31 कंपनियों ने 39,214 करोड़ जुटाए।

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मुख्य संपादक

2 मिनट मुंबई

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IPO बाजार में आने वाली है बहार: 145 कंपनियों को SEBI की मंजूरी, जियो, जेप्टो, ओयो कतार में
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज — प्रतीकात्मक फोटो: BSEINDIA / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

शेयर बाजार में आने वाले महीनों में IPO की बाढ़ आ सकती है। बाजार नियामक SEBI ने 145 कंपनियों के IPO को मंजूरी दे दी है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक 25 सितंबर तक इन IPO का कुल प्रस्तावित आकार करीब 2.75 लाख करोड़ रुपये है। इनमें 61 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने अपने IPO का आकार नहीं बताया है, उनसे करीब 91,500 करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है।

हालांकि बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इनमें से करीब 35 से 45 प्रतिशत यानी 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये के IPO ही वास्तव में बाजार में आएंगे।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (प्रतीकात्मक)
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (प्रतीकात्मक) — प्रतीकात्मक फोटो: Appaiah / Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0)

कतार में बड़े नाम

  • जियो प्लेटफॉर्म्स: करीब 35,000 करोड़ रुपये
  • अवाडा इलेक्ट्रो: करीब 7,600 करोड़ रुपये
  • ओयो: करीब 6,650 करोड़ रुपये
  • जेप्टो: करीब 5,106 करोड़ रुपये
  • क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज: करीब 5,000 करोड़ रुपये

पहली छमाही में सुस्ती, सितंबर में तेजी

अप्रैल से अगस्त के बीच IPO से 46,453 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले साल की इसी अवधि के 55,338 करोड़ रुपये से करीब 16 प्रतिशत कम है। लेकिन सितंबर में बाजार में तेजी लौटी और 31 कंपनियों ने IPO से 39,214 करोड़ रुपये जुटाए। इनमें NSE का 22,560 करोड़ रुपये का IPO देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO बन गया।

निवेशकों के लिए जानकारों की राय

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के संतोष मीणा का मानना है कि बड़े IPO के मुकाबले मझोले आकार के IPO में मजबूत कारोबार और वाजिब मूल्यांकन वाले बेहतर मौके मिल सकते हैं।

IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) पढ़ें, कंपनी का कारोबार, कर्ज और मुनाफा देखें और सिर्फ ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) की चर्चा के भरोसे निवेश न करें। निवेश का फैसला अपनी जोखिम क्षमता और किसी पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की राय के आधार पर ही लें। इस बीच 7 अक्टूबर को RBI की मौद्रिक नीति का फैसला भी आना है, जिस पर बाजार की नजर है।

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