मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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मां का मंगलसूत्र गिरवी रखने की आई नौबत, अब ₹2.5 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹51 करोड़!

कन्नड़ फिल्म ‘प्रेमदा ऊराली’ ने बेहद कम बजट में बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की है। करीब ₹2.5 करोड़ में बनी इस फिल्म ने 18 दिनों में ₹51.65 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन किया। फिल्म के निर्देशक मनोज कुमार को इसे बनाने के दौरान आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था और रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौबत मां का मंगलसूत्र बेचने तक आ गई थी।

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Pawan Kumar

4 मिनट luckhnow

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मां का मंगलसूत्र गिरवी रखने की आई नौबत, अब ₹2.5 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹51 करोड़!
बॉक्स ऑफिस पर सफलता के लिए हमेशा बड़े सितारों, भारी बजट और करोड़ों रुपये के प्रचार की जरूरत नहीं होती

बॉक्स ऑफिस पर सफलता के लिए हमेशा बड़े सितारों, भारी बजट और करोड़ों रुपये के प्रचार की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक अच्छी कहानी और उसे दर्शकों तक पहुंचाने का जुनून भी कमाल कर सकता है। कन्नड़ फिल्म **‘प्रेमदा ऊराली’** की कहानी कुछ ऐसी ही बताई जा रही है। कथित तौर पर महज 2.5 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। सैक्निल्क के आंकड़ों के मुताबिक, रिलीज के 18 दिनों के भीतर फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 51.65 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, फिल्म की शुरुआत धीमी रही, लेकिन बाद में दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ने के साथ इसकी कमाई में भी तेजी आई।

 2.5 करोड़ का बजट, 18 दिनों में 51.65 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन

मनोज कुमार के निर्देशन में बनी ‘प्रेमदा ऊराली’ को शुरुआती दिनों में बॉक्स ऑफिस पर खास प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने शुरुआत में करीब 60 शो से लगभग 9 लाख रुपये की कमाई की। इसके बाद धीरे-धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और फिल्म को ज्यादा शो मिलने लगे।

बताया जा रहा है कि रिलीज के 15वें दिन फिल्म ने 1,178 शो के जरिए करीब 4.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इस दौरान इसकी ऑक्यूपेंसी लगभग 57 प्रतिशत रही। सैक्निल्क के आंकड़ों के अनुसार, 18 दिनों में फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 51.65 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यदि फिल्म का बताया जा रहा 2.5 करोड़ रुपये का बजट सही है, तो यह आंकड़ा इसके कारोबार में बड़ी बढ़त को दर्शाता है। हालांकि, ग्रॉस कलेक्शन और निर्माताओं की वास्तविक कमाई अलग-अलग होती है।

 शादी के कार्ड बांटकर किया फिल्म का प्रचार

फिल्म की चर्चा सिर्फ इसकी कमाई को लेकर ही नहीं, बल्कि प्रचार के अनोखे तरीके को लेकर भी हो रही है। सीमित बजट के कारण फिल्म की टीम बड़े स्तर पर विज्ञापन और प्रमोशन नहीं कर सकती थी। ऐसे में निर्देशक मनोज कुमार और उनकी टीम ने लोगों तक पहुंचने का एक अलग तरीका अपनाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की रिलीज से एक दिन पहले निर्देशक को चिंता थी कि कहीं फिल्म दर्शकों तक पहुंच ही न पाए। इसके बाद टीम ने शादी के निमंत्रण पत्र जैसे कार्ड छपवाए और बसों में सफर के दौरान लोगों के बीच बांटे। इन कार्ड्स के जरिए लोगों से फिल्म देखने और उसे मौका देने की अपील की गई।

कम खर्च में लोगों का ध्यान खींचने की इस कोशिश ने फिल्म के प्रचार को अलग पहचान दी। धीरे-धीरे फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ी और सिनेमाघरों में दर्शकों की दिलचस्पी भी बढ़ने लगी। हालांकि, फिल्म की बढ़ती कमाई में इस प्रचार अभियान का कितना योगदान रहा, इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

 फिल्म पूरी करने के लिए मां का मंगलसूत्र गिरवी रखने की नौबत

‘प्रेमदा ऊराली’ की सफलता के पीछे संघर्ष की कहानी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि फिल्म बनाने के दौरान निर्देशक मनोज कुमार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों के बीच फिल्म को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था।

हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि निर्देशक को फिल्म का काम पूरा करने के लिए अपनी मां का मंगलसूत्र तक गिरवी रखने के बारे में सोचना पड़ा। ऐसे में फिल्म को मिल रही सफलता उनके लिए भावनात्मक रूप से भी खास मानी जा रही है। हालांकि, इस घटना के बारे में सामने आई जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

 कम बजट की फिल्मों के लिए बनी मिसाल

‘प्रेमदा ऊराली’ का बॉक्स ऑफिस सफर एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या किसी फिल्म की सफलता के लिए बड़ा बजट और सुपरस्टार होना जरूरी है? फिल्म के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद कोई प्रोजेक्ट दर्शकों के बीच जगह बना सकता है। इसके लिए कहानी, दर्शकों की प्रतिक्रिया और प्रचार की रणनीति अहम भूमिका निभा सकते हैं।

‘हनुमान’ और ‘लालो’ जैसी फिल्मों की सफलता ने भी पहले दिखाया है कि कम बजट की फिल्में दर्शकों का समर्थन मिलने पर अच्छा कारोबार कर सकती हैं। वहीं, बड़े बजट की फिल्मों को अपनी लागत निकालने के लिए ज्यादा कमाई करनी पड़ सकती है।

फिलहाल ‘प्रेमदा ऊराली’ की कमाई के बताए जा रहे आंकड़े फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ाते हैं। हालांकि, इसकी वास्तविक लागत, वितरण से जुड़े खर्च और निर्माताओं के हिस्से में आने वाली रकम के बिना सटीक मुनाफे का आकलन नहीं किया जा सकता। फिर भी, फिल्म की कहानी मेहनत, सीमित संसाधनों और दर्शकों तक पहुंचने के नए तरीकों की अहमियत को सामने लाती है।

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