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नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तरडे,

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की कम मौजूदगी को लेकर मराठी अभिनेता और फिल्ममेकर प्रवीण तरडे ने नाराजगी जताई है। ABP माझा के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “बॉलीवुड नाना से बड़ा नहीं है।”

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Pawan Kumar

6 मिनट mumbai

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नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तरडे,
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों को झकझोर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर को उनके निधन के बाद पुणे के पास उनके गांव में अंतिम संस्कार किया गया

Nana Patekar Death: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों को झकझोर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर को उनके निधन के बाद पुणे के पास उनके गांव में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों, दोस्तों और मराठी सिनेमा से जुड़े कई कलाकारों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई बड़े सितारों की गैरमौजूदगी को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। मराठी अभिनेता और फिल्ममेकर प्रवीण तरडे ने इस पर निराशा जताते हुए कहा कि नाना पाटेकर को अपना दोस्त मानने वाले बॉलीवुड सितारों को उन्हें आखिरी विदाई देने के लिए मौजूद रहना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि बॉलीवुड के बड़े नामों के न पहुंचने से नाना की महानता कम नहीं होती, क्योंकि उनके लिए किसानों का सम्मान सबसे ज्यादा मायने रखता था।

 बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर प्रवीण तरडे ने जताई नाराजगी

नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में मराठी फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान, साजिद नाडियाडवाला और जैकी श्रॉफ जैसे कुछ चुनिंदा लोगों के अलावा बॉलीवुड के कई बड़े सितारे वहां नजर नहीं आए। इसी बात को लेकर प्रवीण तरडे ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रवीण तरडे का कहना है कि नाना पाटेकर कई लोगों को अपना दोस्त मानते थे और ऐसे में उनके अंतिम संस्कार में उनकी मौजूदगी की उम्मीद की जा रही थी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसे अंतिम विदाई देने पहुंचना रिश्तों और सम्मान का प्रतीक होता है। प्रवीण के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि बॉलीवुड से और भी लोग नाना को श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी से नाना पाटेकर के व्यक्तित्व और उनके योगदान पर कोई असर नहीं पड़ता। उनके शब्दों में, नाना का कद इतना बड़ा था कि किसी की मौजूदगी या गैरमौजूदगी से उनकी महानता को नहीं आंका जा सकता।

‘नाना के अंतिम संस्कार में किसानों की मौजूदगी ज्यादा अहम थी’

प्रवीण तरडे ने मराठी समाचार चैनल ABP माझा से बातचीत के दौरान नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में पहुंचे किसानों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे और नाना के जीवन में किसानों का स्थान बेहद महत्वपूर्ण था।

प्रवीण ने कहा, “नाना पाटेकर को आखिरी विदाई देने के लिए वहां कई किसान जमा हुए थे, जो इंडस्ट्री के लोगों की मौजूदगी से कहीं ज्यादा अहम थे।” उन्होंने आगे कहा कि नाना खुद को केवल अभिनेता नहीं, बल्कि किसान भी मानते थे। यही वजह है कि उनके अंतिम संस्कार में किसानों की भागीदारी उनके लिए खास मायने रखती थी।

प्रवीण तरडे ने किसानों और बॉलीवुड सितारों की तुलना करते हुए कहा कि उनके लिए मेहनत करने वाले किसान का महत्व किसी फिल्मी सितारे से कम नहीं, बल्कि कहीं ज्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार में शामिल किसानों के पसीने और मिट्टी की खुशबू नाना के जीवन और उनकी सोच से जुड़ी हुई थी।

उनकी इस टिप्पणी का मुख्य संदेश यही था कि नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। वह जमीन से जुड़े व्यक्ति थे और किसानों के साथ उनका रिश्ता उनकी सार्वजनिक छवि का अहम हिस्सा रहा है।

 ‘बॉलीवुड नाना पाटेकर से बड़ा नहीं है’

प्रवीण तरडे ने अपने बयान में नाना पाटेकर के व्यक्तित्व और उनके जीवन मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के सितारों का अंतिम संस्कार में शामिल न होना नाना की महानता को कम नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, नाना पाटेकर का सम्मान उनकी फिल्मों, लोकप्रियता या बड़े सितारों के साथ रिश्तों से कहीं आगे था।

प्रवीण ने कहा कि नाना ने कभी अपनी पहचान केवल बॉलीवुड अभिनेता के रूप में नहीं देखी। वह खुद को किसान बताते थे और जमीन से जुड़े रहना पसंद करते थे। इसी कारण उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी उनके लिए सबसे अहम बात थी।

उन्होंने कहा, “बॉलीवुड नाना से बड़ा नहीं है। नाना एक महान इंसान थे।” इस बयान के जरिए प्रवीण तरडे ने यह बताने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति की असली पहचान उसके मानवीय गुणों, विचारों और समाज से उसके जुड़ाव से बनती है, न कि केवल फिल्मी दुनिया में उसकी लोकप्रियता से।

 ‘जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे, उन्हें आना चाहिए था’

प्रवीण तरडे ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें बॉलीवुड के उन लोगों से शिकायत है, जिन्हें नाना पाटेकर अपना दोस्त मानते थे। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों को कम से कम अंतिम संस्कार में पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि अंतिम विदाई के समय बॉलीवुड से और भी लोग मौजूद होंगे। प्रवीण ने यह भी टिप्पणी की कि मुंबई में किसी छोटे कलाकार के निधन पर भी कई सितारे पहुंच जाते हैं, लेकिन नाना पाटेकर जैसे दिग्गज के अंतिम संस्कार में अपेक्षाकृत कम बॉलीवुड हस्तियों की मौजूदगी उन्हें खली।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंततः किसानों की मौजूदगी उनके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रही। उनके बयान से स्पष्ट है कि उनकी नाराजगी नाना के प्रति सम्मान और उनसे जुड़े रिश्तों को लेकर थी।

 नाना पाटेकर का किसानों से खास जुड़ाव

नाना पाटेकर अपनी अभिनय प्रतिभा के साथ-साथ सामाजिक कार्यों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने और जरूरतमंद किसानों की सहायता के लिए काम किया। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में भी उनके प्रति सम्मान देखने को मिलता रहा है।

प्रवीण तरडे के बयान में भी यही बात प्रमुखता से सामने आई कि नाना के लिए किसान होना केवल एक परिचय नहीं, बल्कि उनकी सोच और जीवन से जुड़ा हुआ पहलू था। अंतिम संस्कार में किसानों की मौजूदगी को उन्होंने नाना के प्रति सच्चे सम्मान के रूप में देखा।

नाना पाटेकर के निधन पर उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी। वहीं, अंतिम संस्कार में बॉलीवुड की कम मौजूदगी को लेकर प्रवीण तरडे की टिप्पणी ने एक नई बहस छेड़ दी है।

 अंतिम विदाई के बाद शुरू हुई नई चर्चा

नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर प्रवीण तरडे का बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने एक तरफ उन कलाकारों के प्रति निराशा जताई, जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे, तो दूसरी तरफ किसानों की मौजूदगी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि बताया।

उनके बयान का सार यही है कि नाना पाटेकर की महानता को बॉलीवुड के सितारों की मौजूदगी से नहीं मापा जा सकता। उनके लिए नाना का जमीन से जुड़ाव, किसानों के प्रति सम्मान और उनका मानवीय व्यक्तित्व सबसे बड़ी पहचान थी।

फिलहाल, प्रवीण तरडे के बयान ने नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार को लेकर चर्चा तेज कर दी है। उनकी टिप्पणी के केंद्र में यही संदेश है कि किसी कलाकार की असली विरासत उसकी लोकप्रियता से आगे बढ़कर उसके विचारों, रिश्तों और समाज के साथ उसके जुड़ाव में दिखाई देती है।

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