भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली और सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,400 के नीचे फिसल गया। बाजार पर RBI की 25 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ोतरी, महंगे क्रूड, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपये का दबाव रहा।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर को तेज गिरावट देखने को मिली। रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के बाद बाजार पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी सेंटीमेंट खराब किया है। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,400 के स्तर से नीचे चला गया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में
बाजार की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई। सुबह करीब 9:19 बजे सेंसेक्स 176.54 अंक यानी 0.24% गिरकर 72,462.16 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 61.05 अंक यानी 0.27% की गिरावट के साथ 22,542 पर था।
इसके बाद बिकवाली का दबाव और बढ़ा। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स करीब 400 अंक नीचे पहुंच गया और निफ्टी 22,500 के नीचे फिसल गया। बाद में दोनों प्रमुख सूचकांकों की गिरावट और गहरी हुई।
RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी का असर
बाजार में गिरावट की बड़ी वजह रिजर्व बैंक का ताजा फैसला है। RBI ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे **5.50%** कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर **‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’** कर दिया है।
रेपो रेट में बढ़ोतरी से ब्याज दरों को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। निवेशकों को आशंका है कि ऊंची ब्याज दरों का असर कंपनियों की फंडिंग लागत और कमाई पर पड़ सकता है।
IT शेयरों ने संभाला मोर्चा
बाजार में चौतरफा गिरावट के बीच IT सेक्टर ने कुछ राहत दी। शुरुआती कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 1.8% ऊपर रहा। **TCS, HCL Technologies, Infosys और Tech Mahindra** जैसे IT शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। TCS के शेयर में करीब 2.5% की तेजी रही और कंपनी के तिमाही नतीजों पर भी बाजार की नजर बनी हुई थी।
इसके उलट कई अन्य सेक्टर दबाव में रहे। रियल्टी, मेटल और FMCG समेत कई इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली।
महंगा क्रूड भी बढ़ा रहा बाजार की चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा क्रूड महंगाई और रुपये दोनों के लिए चिंता बढ़ा सकता है।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत बनी हुई है। 7 अक्टूबर को FIIs ने करीब **₹6,121 करोड़** की बिकवाली की थी।
Paytm के शेयरों पर भी दबाव
इस बीच Paytm से जुड़ी नियामकीय खबर ने भी कंपनी के शेयरों को प्रभावित किया। RBI ने **Paytm Payments Bank Limited** को रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की Second Schedule से बाहर कर दिया है। यह कार्रवाई 31 जुलाई 2026 की अधिसूचना के आधार पर हुई और इसे 7 सितंबर को राजपत्र में प्रकाशित किया गया था।
हालांकि Paytm की ओर से स्पष्ट किया गया है कि UPI, QR पेमेंट, Soundbox, कार्ड मशीन और Payment Gateway जैसी उसकी प्रमुख सेवाएं मल्टी-बैंक मॉडल पर चलती हैं और Paytm Payments Bank के इस कदम से सीधे प्रभावित नहीं हैं।
निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर
बाजार में फिलहाल RBI की सख्त नीति, महंगा कच्चा तेल, रुपये पर दबाव और वैश्विक बाजारों की कमजोरी जैसे कई कारक एक साथ असर डाल रहे हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। गुरुवार के कारोबार में IT शेयरों ने जरूर राहत दी, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।