सुल्तानपुर: गल्ला मंडी की करोड़ों की नजूल जमीन का पट्टा निजी हाथों में, व्यापारियों ने मांगी जांच
सुल्तानपुर की अमेठी बाड़ा गल्ला मंडी के व्यापारियों ने प्रेस वार्ता कर सवाल उठाया कि अदालत से नौ बार मौका मिलने के बावजूद नगर पालिका ने नजूल भूमि के मुकदमे में अपना पक्ष क्यों नहीं रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
अमेठी बाड़ा गल्ला मंडी के व्यापारियों का जुलूस, हाथों में 'योगी जी न्याय करो' के बैनर — फोटो: लोकतंत्र लाइव टीवी
सुल्तानपुर शहर के बीचोंबीच स्थित अमेठी बाड़ा गल्ला मंडी की नजूल जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। मंडी के व्यापारियों और किरायेदारों ने शनिवार (3 अक्टूबर) को प्रेस वार्ता कर नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताकर खारिज किया था। इससे पहले व्यापारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर जुलूस भी निकाल चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
व्यापारियों ने साफ कहा, 'हम किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहे हैं। हमारा सीधा सवाल है कि नगर पालिका ने अदालत में अपना पक्ष क्यों नहीं रखा।'
प्रेस वार्ता में अपनी बात रखते गल्ला मंडी के व्यापारी — फोटो: लोकतंत्र लाइव टीवी
क्या है पूरा मामला
व्यापारियों के ज्ञापन के मुताबिक शहर के बीच गाटा संख्या 442 से 480 तक की भूमि नजूल यानी राज्य सरकार की संपत्ति है। इसी जमीन पर नगर पालिका परिषद की गल्ला मंडी है, जिसमें सैकड़ों किरायेदार हैं। ज्ञापन में बताया गया है कि वर्ष 1958 में राज्य सरकार ने इस संपत्ति का पट्टा नगर पालिका परिषद के पक्ष में किया था।
व्यापारियों के मुताबिक अदालत का घटनाक्रम
1966 में बिशम्भर दयाल आदि ने राज्य सरकार और नगर पालिका के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया, जो 27 सितंबर 1967 को खारिज हो गया।
अपील पर 31 मई 1983 को जिला जज ने संपत्ति को नजूल मानते हुए अपीलकर्ताओं के नाम पट्टा करने का आदेश दिया।
इसके खिलाफ नगर पालिका ने 1983 में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में द्वितीय अपील संख्या 608/83 दायर की।
जनवरी 2020 में यह अपील खारिज हुई, जिसे 18 नवंबर 2020 को तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष बबिता जायसवाल के समय दोबारा बहाल (रिस्टोर) कराया गया।
व्यापारियों के अनुसार वर्तमान अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल के कार्यकाल में 31 जुलाई 2025 को नगर पालिका के अधिवक्ता के उपस्थित न होने से मामला अदम पैरवी में खारिज हो गया।
इसके बाद 17 मार्च 2026 को सिविल कोर्ट नंबर 18 के जरिए नजूल भूमि का पट्टा रामनिवास अग्रवाल व अन्य के नाम पंजीकृत हो गया।
सबसे बड़ा सवाल: नौ मौके, फिर भी पक्ष क्यों नहीं रखा
व्यापारियों का कहना है कि पट्टा पंजीकृत होने की प्रक्रिया के दौरान अदालत ने करीब एक महीने में नौ बार नगर पालिका को अपना पक्ष रखने का मौका दिया, लेकिन नगर पालिका ने अदालत में अपना पक्ष नहीं रखा। उन्होंने सवाल किया कि जब नगर पालिका खुद इस भूमि और मुकदमे में महत्वपूर्ण पक्ष थी, तो इतने मौके मिलने के बावजूद प्रभावी पैरवी क्यों नहीं हुई। व्यापारियों ने यह भी कहा कि अगर नगर पालिका की ओर से कोई गलती नहीं हुई है, तो निष्पक्ष जांच से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
व्यापारियों के ज्ञापन में यह आरोप भी लगाया गया है कि नगर पालिका अध्यक्ष इस मुकदमे के विपक्षी बिशम्भर दयाल अग्रवाल के पौत्र हैं। व्यापारियों का यह भी कहना है कि जमीन खाली नहीं है, उस पर नगर पालिका की मार्केट और किरायेदार हैं, इसलिए यह पट्टा नियम के खिलाफ है।
नगर पालिका अध्यक्ष और प्रशासन का पक्ष
नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने अपनी प्रेस वार्ता में अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताकर खारिज किया है। इससे पहले 29 सितंबर को व्यापारियों के प्रदर्शन के समय उन्होंने कहा था कि नगर पालिका की ओर से किसी भी व्यापारी को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। उनके मुताबिक 2020 की याचिका खारिज होने के बाद नगर पालिका ने पुनः हाईकोर्ट में अपील की है।
व्यापारियों ने 29 सितंबर को मंडी से कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकालकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। उस समय जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया था कि दुकानें खाली नहीं होंगी और वे खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं।
'आंदोलन राजनीतिक नहीं'
अध्यक्ष के राजनीति वाले आरोप पर व्यापारियों ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर जवाब दिया। व्यापारियों ने कहा कि उन्होंने यह लड़ाई खुद शुरू की है, जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है और किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे आंदोलन नहीं किया। उन्होंने माना कि अलग-अलग दलों के लोगों ने समर्थन की बात कही, लेकिन आंदोलन को दलों से दूर रखा गया है। व्यापारियों ने याद दिलाया कि गल्ला मंडी के व्यापारी रामनिवास अग्रवाल के समय से लेकर प्रवीण अग्रवाल तक नगर पालिका में उनके परिवार का साथ देते आए हैं, इसलिए आज उनके सवालों को राजनीतिक षड्यंत्र बताना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री से व्यापारियों की 9 मांगें
गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
1983 से मार्च 2026 तक के पूरे न्यायालयीन और प्रशासनिक घटनाक्रम की जांच हो।
जांच हो कि नगर पालिका की ओर से मुकदमे में प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की गई।
मार्च 2026 में हुए नजूल भूमि के पट्टे की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो।
लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारी या व्यक्ति पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
निष्पक्ष जांच के लिए नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की भूमिका की भी जांच हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें पद से हटाने या निलंबित करने पर फैसला लिया जाए।
पंजीकृत पट्टे की वैधानिकता की जांच हो और नियम विरुद्ध पाए जाने पर उसे निरस्त किया जाए।
अदम पैरवी में खारिज हुए मुकदमे को कानून के अनुसार दोबारा बहाल कराया जाए।
गल्ला मंडी के व्यापारियों और किरायेदारों के हितों की रक्षा की जाए।
विरोध दर्ज कराने वाले व्यापारी
प्रेस वार्ता और विरोध प्रदर्शन में संतोष अग्रवाल, मुन्ना लाल जायसवाल, संजय अग्रवाल, शंकर कैलाशी, मनीष साहू, अंकित साहू, बैजनाथ कसौधन, राहुल अग्रहरि, उमाशंकर, प्रशू जायसवाल, रामजी कसौधन, संजय जायसवाल, विशाल साहू, सोमदत्त अग्रवाल, हर्ष अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, दिनेश कसौधन, अनिल अग्रहरि, नन्दू जी, संदीप कसौधन, अमित खत्री और संजय कसौधन समेत बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल रहे।
व्यापारियों ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकार, रोजी-रोटी और न्याय के लिए है। जब तक पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होकर सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक वे लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। इस मामले में नगर पालिका या जिला प्रशासन का कोई नया पक्ष आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।