नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। यह UNGA में उनका पहला भाषण था। अपने संबोधन में उन्होंने नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़, जलवायु संकट, हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों और…
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। यह UNGA में उनका पहला भाषण था। अपने संबोधन में उन्होंने नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़, जलवायु संकट, हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों और वैश्विक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेपाल में आई बाढ़ केवल एक देश की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है।
बालेन शाह ने बताया कि बोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ में कम से कम 1,400 लोगों की मौत हुई है और 6,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी को प्रभावित कर रहा है। ग्लेशियरों के पिघलने, पहाड़ों के अस्थिर होने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
अपने भाषण में उन्होंने भारत और चीन का विशेष रूप से आभार जताया। बालेन शाह ने कहा कि आपदा के बाद नेपाल के करीबी पड़ोसी भारत और चीन ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, मानवीय संस्थाओं, मित्र देशों और दुनियाभर से मिले सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।
बालेन शाह ने वैश्विक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दुनिया में युद्ध से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था तेजी से काम करती है, लेकिन आम लोगों तक भोजन, ईंधन और जरूरी संसाधन पहुंचाने वाली व्यवस्था में कई कमियां हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया ने युद्ध के लिए प्रभावी लॉजिस्टिक्स तैयार कर ली है, लेकिन भोजन के लिए व्यवस्था कमजोर है। उन्होंने इसे केवल नेपाल की समस्या न बताते हुए बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों की चुनौतियों से भी जोड़ा।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने हिमालयी देशों के बीच सहयोग का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने नेपाल, भारत और चीन की भागीदारी से ‘Himalayan Climate Resilience Mechanism’ बनाने की बात कही, जिसके जरिए सैटेलाइट डेटा साझा करने, ग्लेशियल झीलों की निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली मजबूत करने और आपदा के समय सीमा-पार राहत समन्वय को बेहतर करने का प्रस्ताव रखा गया।
भाषण के अंत में बालेन शाह ने नेपाल की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ से विश्व के कल्याण की कामना की और कहा कि दुनिया भगवान बुद्ध द्वारा दिखाए गए शांति और करुणा के मार्ग पर आगे बढ़े। उनके भाषण का समापन नेपाली भाषा में धन्यवाद और नमस्ते के साथ हुआ।