US Election: बिना EVM के अमेरिका में कैसे गिने जाते हैं करोड़ों वोट? जानिए भारत से कितना अलग है चुनावी तरीका
नई दिल्ली: चुनाव में वोटिंग और मतगणना की प्रक्रिया को लेकर अक्सर भारत और अमेरिका की तुलना की जाती है। भारत में जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल होता है, वहीं अमेरिका के कई राज्यों में आज भी पेपर बैलेट यानी कागज के मतपत्रों के जरिए मतदान कराया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अमेरिका में लाखों-करोड़ों मतपत्रों पर वोट पड़ते हैं, तो उनकी गिनती इतनी बड़ी संख्या में कैसे की जाती है?
अमेरिका में चुनावी प्रक्रिया भारत से काफी अलग है। वहां पूरे देश के लिए एक जैसी चुनावी व्यवस्था नहीं है, बल्कि हर राज्य और स्थानीय प्रशासन अपने नियमों के अनुसार चुनाव कराता है।
अमेरिका में कैसे होती है वोटों की गिनती?
1. बैलेट पेपर पर पड़ता है वोट: अमेरिका में ज्यादातर मतदाता कागज के बैलेट पर उम्मीदवार के नाम के सामने बने गोले या बॉक्स में निशान लगाते हैं।
2. स्कैनर मशीन करती है गिनती: मतदान के बाद बैलेट पेपर को इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर में डाला जाता है। मशीन निशान पढ़कर उम्मीदवार के खाते में वोट जोड़ देती है। बड़े सेंटरों में हाई-स्पीड स्कैनर एक घंटे में हजारों बैलेट पढ़ सकते हैं।
3. चुनाव से पहले ही शुरू हो जाती है तैयारी: अमेरिका के कई राज्यों में एडवांस वोटिंग और डाक से मतदान की सुविधा है। चुनाव से पहले ही मतदाताओं की जानकारी, हस्ताक्षर और बैलेट की जांच कर ली जाती है।
4. हजारों सेंटरों पर एक साथ काउंटिंग: अमेरिका में पूरे देश की मतगणना एक जगह नहीं होती। 10 हजार से ज्यादा स्थानीय चुनावी क्षेत्रों में अलग-अलग टीमें एक साथ वोटों की गिनती करती हैं।
5. पूरी गिनती से पहले कैसे आते हैं नतीजे? अमेरिका में एसोसिएटेड प्रेस (AP) जैसी न्यूज एजेंसियां गिने गए वोटों और बाकी बचे मतपत्रों का विश्लेषण करके विजेता का अनुमान घोषित कर सकती हैं। ये आधिकारिक नतीजे नहीं होते। अंतिम परिणाम के लिए पूरी गिनती और सत्यापन जरूरी है।
भारत और अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया में अंतर
भारत अमेरिका
लोकसभा-विधानसभा चुनाव में EVM ज्यादातर जगह पेपर बैलेट
EVM में वोट दर्ज बैलेट स्कैनर से गिनती
एक निर्धारित मतगणना व्यवस्था हजारों स्थानीय चुनावी क्षेत्र
चुनाव के बाद मतगणना कई जगह पहले से बैलेट की तैयारी
आखिर अमेरिका में जल्दी कैसे आती है चुनावी तस्वीर?
अमेरिका में तेजी से नतीजे सामने आने की वजह केवल मशीनें नहीं हैं। एडवांस वोटिंग, पहले से बैलेट की जांच, हाई-स्पीड स्कैनर और हजारों जगहों पर एक साथ होने वाली मतगणना इसकी प्रमुख वजहें हैं।
हालांकि, चुनाव की रात आने वाले आंकड़ों को अंतिम परिणाम समझना सही नहीं है। आधिकारिक नतीजों में कई दिन या कभी-कभी हफ्ते भी लग सकते हैं।