असम में मुख्यमंत्री के काफिले को रास्ता देने के लिए एंबुलेंस रोके जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एंबुलेंस में मरीज को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन काफिले के गुजरने के इंतजार में उसे रोक दिया गया। मरीज की मौत के बाद घटना को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सिलचर, असम: मुख्यमंत्री का काफिला निकल गया, लेकिन अस्पताल ले जाया जा रहा एक गंभीर मरीज जिंदगी की जंग हार गया। असम के सिलचर में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के काफिले को रास्ता देने के लिए एक एंबुलेंस रोके जाने का मामला सामने आया। एंबुलेंस में सवार मरीज की अगले दिन अस्पताल में मौत हो गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद वीआईपी काफिलों की व्यवस्था और आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठने लगे।
यह घटना 30 सितंबर 2026 को सिलचर के रामनगर ISBT इलाके में हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एंबुलेंस श्रीभूमि जिले के निवासी रसराज चक्रवर्ती को बेहतर इलाज के लिए सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जा रही थी। मरीज की हालत गंभीर थी और वह लिवर संबंधी बीमारी से पीड़ित था।
काफिले के लिए रोकी गई एंबुलेंस
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान यातायात संभाल रहे पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस को रोक दिया। इस दौरान एंबुलेंस सड़क पर खड़ी रही और मुख्यमंत्री का काफिला वहां से गुजर गया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को ले जा रही एंबुलेंस को वीआईपी काफिले के लिए क्यों रोका गया।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना गया क्योंकि एंबुलेंस किसी सामान्य यात्रा पर नहीं, बल्कि इलाज के लिए मरीज को अस्पताल ले जा रही थी।
अगले दिन अस्पताल में मरीज की मौत
रसराज चक्रवर्ती को सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक अक्टूबर की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मरीज की मौत और एंबुलेंस रोके जाने की घटना के सामने आने के बाद लोगों ने यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों और परिवार की ओर से उपलब्ध बयानों के अनुसार, मरीज पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित था और उसकी मौत का एंबुलेंस रुकने से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ।
इसलिए यह कहना कि केवल काफिले के कारण ही मरीज की जान गई, उपलब्ध जानकारी से प्रमाणित नहीं होता। लेकिन आपातकालीन वाहन को रोकने की घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्राथमिकता को लेकर बहस जरूर छेड़ दी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना पर खेद जताया और मरीज तथा उसके परिवार से माफी मांगी।
उन्होंने कहा कि किसी मुख्यमंत्री के काफिले को आपातकालीन चिकित्सा सहायता से ऊपर प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद राज्य सरकार ने काफिले की आवाजाही के दौरान एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को नहीं रोकने के निर्देश भी जारी किए।
चार पुलिसकर्मी निलंबित
इस मामले में कार्रवाई करते हुए कछार जिले के चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। घटना की जांच के आदेश भी दिए गए।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि एंबुलेंस, दमकल वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं को वीआईपी काफिले की वजह से बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
सवाल सिर्फ एक काफिले का नहीं, व्यवस्था का भी है
यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है—क्या किसी वीआईपी के गुजरने के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को रोका जाना चाहिए?
सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण जरूरी हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एंबुलेंस की आवाजाही बाधित न हो।
असम की इस घटना में मुख्यमंत्री ने माफी मांगी, चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और नए निर्देश जारी किए गए। अब महत्वपूर्ण यह है कि इन निर्देशों का पालन जमीन पर भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी मरीज को आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए इंतजार न करना पड़े।
यह घटना याद दिलाती है कि सड़क पर किसी भी व्यक्ति की जान और आपातकालीन इलाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पद और काफिले की व्यवस्था चाहे जो हो, एंबुलेंस के रास्ते में बाधा नहीं आनी चाहिए।