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भारतीय सेना को एक साथ मिले 450 नागास्त्र-1R ड्रोन, SDAL ने पूरी की बड़ी खेप की आपूर्ति

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना को एक साथ 450 नागास्त्र-1R लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन की आपूर्ति पूरी कर ली है। कंपनी के अनुसार, यह भारतीय सशस्त्र बलों को एक बार में दी गई इस तरह के हथियारों की सबसे बड़ी खेप है।

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Pawan Kumar

3 मिनट नई दिल्ली

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भारतीय सेना को एक साथ मिले 450 नागास्त्र-1R ड्रोन, SDAL ने पूरी की बड़ी खेप की आपूर्ति
भारतीय सेना को स्वदेशी रक्षा तकनीक से लैस करने की दिशा में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने एक अहम उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है।

नई दिल्ली। भारतीय सेना को स्वदेशी रक्षा तकनीक से लैस करने की दिशा में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने एक अहम उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। कंपनी के मुताबिक, उसने भारतीय सेना को एक ही खेप में 450 लोइटरिंग म्यूनिशन की आपूर्ति पूरी कर दी है। ये नागास्त्र-1R सिस्टम हैं, जिन्हें सेना ने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत ऑर्डर किया था। कंपनी का कहना है कि किसी निर्माता की ओर से भारतीय सेना को एक बार में दी गई यह इस तरह की सबसे बड़ी खेप है।

 क्या है नागास्त्र-1R और कैसे करता है काम?

नागास्त्र-1R एक प्रकार का लोइटरिंग म्यूनिशन है, जिसे लक्ष्य वाले क्षेत्र में कुछ समय तक उड़ान भरने और उपयुक्त अवसर मिलने पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे आम तौर पर ‘कामिकाजे ड्रोन’ भी कहा जाता है। यह पारंपरिक ड्रोन की तरह केवल निगरानी या सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वयं लक्ष्य पर हमला करने के लिए डिजाइन किया जाता है।

कंपनी के अनुसार, नागास्त्र-1R को भारतीय सेना की परिचालन संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें मिशन को बीच में रद्द करने और ड्रोन को वापस सुरक्षित हासिल करने का विकल्प भी दिया गया है। इससे मिशन की परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई में बदलाव करने की सुविधा मिल सकती है।

 तकनीकी परीक्षणों में प्रदर्शन का दावा

SDAL के अनुसार, मार्च 2025 में महाराष्ट्र के मकलोह स्थित SFTS में इस प्रणाली के तकनीकी परीक्षण आयोजित किए गए थे। इन परीक्षणों में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था। कंपनी का दावा है कि सभी परिचालन मानकों पर खरा उतरने वाली एकमात्र कंपनी SDAL थी। हालांकि, परीक्षणों के विस्तृत आधिकारिक परिणामों और तुलनात्मक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

कंपनी ने यह भी बताया कि सिस्टम की सटीकता का आकलन लक्ष्य पर निशाना लगाने की क्षमता से जुड़े कई लाइव ट्रायल के आधार पर किया गया। ऐसे परीक्षणों का उद्देश्य वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में प्रणाली की उपयोगिता का मूल्यांकन करना होता है।

 आधुनिक युद्ध में बढ़ रही लोइटरिंग म्यूनिशन की भूमिका

हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई संघर्षों में ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल बढ़ा है। इन प्रणालियों का उपयोग निगरानी, लक्ष्य की पहचान और हमला करने जैसे सैन्य अभियानों में किया जाता है। अपेक्षाकृत कम लागत में सटीक कार्रवाई की क्षमता के कारण विभिन्न देशों की सेनाएं इस तकनीक पर ध्यान दे रही हैं।

SDAL का कहना है कि वह अपनी लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणालियों की तैनाती का विस्तार करने और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर काम कर रही है। हालांकि, किसी भी प्रणाली की वास्तविक प्रभावशीलता उसके परीक्षण परिणामों, परिचालन परिस्थितियों और सेना की जरूरतों पर निर्भर करती है।

 नागास्त्र-1 का स्वदेशी विकास

नागास्त्र-1 को सोलर इंडस्ट्रीज नागपुर की सहायक कंपनी इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) ने बेंगलुरु की जेड-मोशन के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नागास्त्र-1 में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यह स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास और देश में सैन्य तकनीक निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।

450 नागास्त्र-1R सिस्टम की आपूर्ति से संबंधित कंपनी का दावा ऐसे समय सामने आया है, जब भारतीय सशस्त्र बल आधुनिक और स्वदेशी तकनीकों को अपने अभियानों में शामिल करने पर जोर दे रहे हैं। इस आपूर्ति से जुड़े विस्तृत आधिकारिक विवरण और सिस्टम की परिचालन तैनाती की जानकारी सामने आने पर इसकी भूमिका को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

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