राजस्थान की राजधानी जयपुर में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सनातन सुरक्षा दल ने शहर के विभिन्न गरबा पंडालों के बाहर ऐसे बैनर और पोस्टर लगाए हैं, जिन पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की बात लिखी गई है।
जयपुर। नवरात्रि के साथ ही राजधानी जयपुर में गरबा महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच शहर के अलग-अलग इलाकों में गरबा पंडालों के बाहर लगाए गए पोस्टरों ने विवाद और चर्चा को जन्म दे दिया है। इन पोस्टरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए गरबा समितियों को चेतावनी दी गई है।
गरबा समितियों को ‘अंतिम चेतावनी’
ये पोस्टर सनातन सुरक्षा दल जयपुर महानगर के नाम से लगाए गए हैं। पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में ‘सनातन सुरक्षा दल जयपुर महानगर की अंतिम चेतावनी’ लिखा है। साथ ही गरबा समितियों से पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को कहा गया है।
पोस्टरों में गरबा को धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा आयोजन बताते हुए चेतावनी दी गई है कि इसकी पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ‘अंतिम चेतावनी’ और ‘कठोर कार्रवाई’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल से यह मामला चर्चा में आ गया है।
चित्रकूट इलाके में प्रदर्शन और नारेबाजी
पोस्टर लगाने के बाद सनातन सुरक्षा दल के सदस्यों ने जयपुर के चित्रकूट इलाके में प्रदर्शन भी किया। संगठन के कार्यकर्ता हाथों में चेतावनी वाले पोस्टर लेकर पहुंचे और नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने दोहराया कि यदि किसी गरबा या डांडिया आयोजक ने गैर-हिंदुओं को प्रवेश दिया, तो संगठन की ओर से कड़े कदम उठाए जाएंगे।
इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से भी गरबा आयोजकों से पंडालों में आने वाले लोगों की पहचान जांचने और पहचान पत्र के जरिए सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग उठाई जा चुकी है।
गरबा आयोजनों की प्रवेश व्यवस्था पर बहस
नवरात्रि के दौरान जयपुर में कई स्थानों पर गरबा और डांडिया महोत्सव आयोजित होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में पोस्टरों के जरिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग ने आयोजनों की प्रवेश व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
फिलहाल इन पोस्टरों को लेकर किसी आधिकारिक कार्रवाई या गरबा आयोजन समितियों की प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि आयोजक इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और प्रवेश व्यवस्था को लेकर क्या निर्णय लेते हैं।