कूरेभार-मंझुई नाले में पुल का मलबा, जल निकासी ठप; 11 गांवों में सैकड़ों बीघा धान डूबा
सुल्तानपुर के कूरेभार क्षेत्र में शारदा सहायक खंड-16 के कूरेभार-मंझुई नाले में पुल निर्माण के लिए बना अस्थायी रास्ता और शटरिंग न हटने से जल निकासी रुक गई। तीन दिन की बारिश के बाद मोकलपुर, बरसोमा, मसीरपुर समेत 11 गांवों में सैकड़ों बीघा धान डूब गया।
पानी में डूबा धान का खेत — प्रतीकात्मक फोटो: Vraj Acharya, WELL Labs / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
सुल्तानपुर के कूरेभार क्षेत्र के किसानों की धान की फसल पानी में डूब गई है। शारदा सहायक खंड-16 के कूरेभार-मंझुई नाले में जल निकासी रुक जाने से तीन दिन की बारिश का पानी खेतों से नहीं निकल सका। इससे सैकड़ों बीघा धान की फसल बर्बाद होने की कगार पर है।
किसानों के मुताबिक बरौंसा-वीरसिंहपुर मार्ग पर पुल निर्माण के दौरान नाले में अस्थायी रास्ता बनाया गया था। काम के बाद मिट्टी और निर्माण सामग्री नाले से नहीं हटाई गई, जिससे पानी का बहाव रुक गया।
धान का खेत — प्रतीकात्मक फोटो: Vis M / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
जूनियर इंजीनियर श्रवण कुमार चौहान ने बताया कि अचानक बारिश की वजह से पुल के नीचे की शटरिंग नहीं हटाई जा सकी। कार्यदायी संस्था को इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया है।
किसानों की मांग है कि नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं निकला तो पूरी फसल सड़ जाएगी।
किसान क्या करें
फसल नुकसान की जानकारी तुरंत अपने हल्के के लेखपाल और कृषि विभाग को दें। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमा कराने वाले किसान 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर 14447 या फसल बीमा ऐप पर सूचना दर्ज कराएं। खेत से पानी निकलने के बाद फसल में बीमारी से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। हैदरगंज-कूरेभार मार्ग को 57 करोड़ रुपये से चौड़ा करने का प्रस्ताव भी इस इलाके के लिए अहम है।