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महाराष्ट्र में सूखा: धाराशिव में फसल बर्बाद, तुलजापुर में 9 महीने में 19 किसानों ने दी जान

महाराष्ट्र के धाराशिव और लातूर में कम बारिश से सोयाबीन, गन्ना और प्याज की फसल सूख गई है। धाराशिव के सभी 8 तालुका सूखाग्रस्त घोषित हैं, पांच साल में भूजल 7.2 मीटर नीचे गया और तुलजापुर तालुका में जनवरी से सितंबर के बीच 19 किसानों ने आत्महत्या की।

म
मुख्य संपादक

2 मिनट धाराशिव, महाराष्ट्र

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महाराष्ट्र में सूखा: धाराशिव में फसल बर्बाद, तुलजापुर में 9 महीने में 19 किसानों ने दी जान
महाराष्ट्र में सोयाबीन का खेत — प्रतीकात्मक फोटो: Valisport24 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। धाराशिव और लातूर के गांवों में खेतों में खड़ी फसल सूख गई है। किसानों को उम्मीद थी कि फसल बेचकर घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अगली फसल की लागत निकल आएगी, लेकिन अब उनके हाथ कुछ नहीं बचा।

धाराशिव जिले के सभी आठ तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। पिछले पांच साल में यहां भूजल का स्तर 7.2 मीटर नीचे चला गया है।

महाराष्ट्र में सोयाबीन का खेत (प्रतीकात्मक)
महाराष्ट्र में सोयाबीन का खेत (प्रतीकात्मक) — प्रतीकात्मक फोटो: Albert Deccan / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

किसानों की आपबीती

तुलजापुर तालुका के करजखेड़ा और काटी जैसे गांवों में किसानों का हाल बेहाल है। सोमन भोसले ने 4.5 एकड़ में फसल बोई थी, जो खेत में ही सूख गई। बलराम अपनी पत्नी मंगल भोसले और बहू प्रतिभा के साथ खेत में बची फसल बचाने में जुटे हैं। अविनाश देशमुख ने 15 एकड़ में सोयाबीन और एक एकड़ में प्याज लगाया था, लेकिन पूरी फसल बर्बाद हो गई।

सूखे के आंकड़े

  • धाराशिव के सभी 8 तालुका सूखाग्रस्त
  • पांच साल में भूजल 7.2 मीटर नीचे
  • प्रभावित फसलें: सोयाबीन, गन्ना, प्याज
  • तुलजापुर तालुका में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 19 किसानों की आत्महत्या
  • राज्य के 358 में से 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, 19 और में सर्वे

कर्ज और अनिश्चितता का दबाव

खेती की बढ़ती अनिश्चितता, फसल के नुकसान और कर्ज के दबाव ने ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा छीन ली है। कई परिवारों में बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह की योजनाएं अटक गई हैं।

किसानों के लिए जरूरी जानकारी

सूखाग्रस्त घोषित तालुकाओं में जमीन राजस्व में छूट, फसल कर्ज वसूली पर रोक और छात्रों की परीक्षा फीस माफी जैसी राहत मिलती है। फसल बीमा कराने वाले किसान नुकसान की सूचना समय पर बीमा कंपनी और कृषि विभाग को दें। मानसिक तनाव में हों तो टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर मुफ्त और गोपनीय बात कर सकते हैं।

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