महाराष्ट्र में सूखे का संकट: 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, 19 और तालुकाओं में सर्वे के आदेश
कमजोर मानसून के बाद महाराष्ट्र सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं यानी करीब 74% हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया है। जनप्रतिनिधियों की मांग पर 19 और तालुकाओं में फसलों का सर्वे होगा। राज्य में 17% कम बारिश हुई, सोलापुर में सबसे ज्यादा 57% कमी रही।
सूखा प्रभावित इलाके में चारा शिविर — प्रतीकात्मक फोटो: Sanket Oswal / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
कमजोर मानसून ने महाराष्ट्र के किसानों की कमर तोड़ दी है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है, यानी राज्य का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में है। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों की मांग पर 19 और तालुकाओं में तुरंत जमीनी जांच और फसलों के सर्वे के आदेश दिए गए हैं।
अधिकारियों को इन 19 तालुकाओं में मुख्य पांच फसलों का 20 प्रतिशत सैंपल सर्वे करने को कहा गया है। सर्वे के नतीजों के आधार पर इन्हें भी सूखाग्रस्त घोषित करने पर फैसला होगा।
सूखा प्रभावित इलाके में चारा शिविर — प्रतीकात्मक फोटो: वर्षा देशपांडे / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
किन जिलों में सबसे कम बारिश
पूरे राज्य में इस मानसून में सामान्य से करीब 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। कुछ जिलों में हालात बेहद गंभीर हैं।
सोलापुर: 57% कम बारिश
बीड: 49% कम
हिंगोली: 48% कम
जालना: 46% कम
धाराशिव: 45% कम
अकोला: 41% कम
मुंबई में भी पानी कटौती
मुंबई का मानसून सीजन भी 1 अक्टूबर को भारी कमी के साथ खत्म हुआ। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने शहर में 10 प्रतिशत पानी कटौती जारी रखी है। मानसून के 5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र से लौटने की उम्मीद है।
सूखाग्रस्त घोषित होने से किसानों को क्या मिलेगा
सूखाग्रस्त तालुकाओं में किसानों को आम तौर पर जमीन राजस्व में छूट, फसल कर्ज की वसूली पर रोक, कर्ज के पुनर्गठन, छात्रों की परीक्षा फीस माफी, पीने के पानी के टैंकर और पशुओं के लिए चारा शिविर जैसी राहत मिलती है। राज्य की ड्रॉट मैनेजमेंट कोड के तहत मानसून में लगातार 21 दिन सूखा रहने को पहला संकेत (ट्रिगर-1) माना जाता है।
किसान अपनी फसल के नुकसान की जानकारी तय समय में कृषि विभाग और फसल बीमा कंपनी को जरूर दें, ताकि मुआवजे के दावे में दिक्कत न आए।