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UPI यूजर्स और व्यापारियों को राहत! दिवाली तक टला MDR चार्ज, ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर क्या होगा?

UPI यूजर्स और व्यापारियों को दिवाली से पहले बड़ी राहत मिली है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है।

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Pawan Kumar

3 मिनट नई दिल्ली

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UPI यूजर्स और व्यापारियों को राहत! दिवाली तक टला MDR चार्ज, ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर क्या होगा?
फेस्टिव सीजन के बीच डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों और कारोबारियों के लिए यूपीआई (UPI) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है।

नई दिल्ली। फेस्टिव सीजन के बीच डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों और कारोबारियों के लिए यूपीआई (UPI) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लागू किए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए फ्रेमवर्क को फिलहाल टाल दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, त्योहारों के दौरान बाजार में खरीदारी और डिजिटल भुगतान की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अब नया फ्रेमवर्क दिवाली के बाद लागू किए जाने की बात कही गई है, जबकि इसकी नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी।

 15 अक्टूबर से लागू होना था नया MDR फ्रेमवर्क

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने की योजना थी। हालांकि, धनतेरस और दिवाली के दौरान बढ़ने वाली खरीदारी को देखते हुए इसके क्रियान्वयन को टालने की जानकारी सामने आई है।

त्योहारों के समय दुकानों और बाजारों में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे में नई शुल्क व्यवस्था लागू होने से कारोबारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए MDR फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाने का फैसला बताया जा रहा है। हालांकि, नई तारीख और नियमों की अंतिम पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से की जानी चाहिए।

 क्या होता है MDR चार्ज?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले कारोबारी से लिया जा सकता है। यह भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी सेवाओं की लागत के लिए निर्धारित किया जाता है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि MDR का संबंध मुख्य रूप से दुकानदार या मर्चेंट की ओर से चुकाए जाने वाले शुल्क से है। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को हर यूपीआई भुगतान पर सीधे अतिरिक्त चार्ज देना होगा। शुल्क लागू होने का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-से ट्रांजेक्शन और कारोबारी इसके दायरे में रखे जाते हैं।

 आम यूपीआई यूजर्स पर क्या होगा असर?

प्रस्तावित MDR व्यवस्था को लेकर आम ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यूपीआई से भुगतान करने पर उन्हें अतिरिक्त पैसे देने होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आम यूजर्स के बीच पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर और सामान्य यूपीआई भुगतान की मौजूदा शुल्क व्यवस्था में बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

हालांकि, अलग-अलग प्रकार के ट्रांजेक्शन और मर्चेंट श्रेणियों के लिए नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी भुगतान पर शुल्क लागू होने की स्थिति में संबंधित बैंक, भुगतान ऐप या आधिकारिक दिशा-निर्देशों की जानकारी देखना जरूरी होगा।

 छोटे दुकानदारों को लेकर क्या है व्यवस्था?

छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम है। चाय की दुकानों से लेकर किराना स्टोर और अन्य छोटे व्यवसायों तक, बड़ी संख्या में व्यापारी इसका इस्तेमाल करते हैं। प्रस्तावित MDR व्यवस्था में किन व्यापारियों को छूट मिलेगी और किन पर शुल्क लागू होगा, यह संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा।

दिवाली तक नए फ्रेमवर्क को टाले जाने की खबर से कारोबारियों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन नई तारीख और अंतिम नियम घोषित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग श्रेणियों के व्यापारियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

फिलहाल सबसे जरूरी बात: MDR फ्रेमवर्क को टालने की खबर सामने आई है, लेकिन नई लागू होने की तारीख और शुल्क के दायरे की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से करना जरूरी है। ग्राहकों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हर यूपीआई भुगतान पर नया चार्ज लगेगा।

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