गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026
लोकतंत्र लाइव टीवी लोगो
ब्रेकिंग

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए बनाया आयोग; सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी बने अध्यक्ष

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन किया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

म
मुख्य संपादक

3 मिनट हिमाचल प्रदेश

शेयर करें:
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए बनाया आयोग; सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी बने अध्यक्ष


शिमला:
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और आम जनता की सुविधा के लिए प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन (Re-organization of Administrative Units) को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में जिलों, उपमंडलों (Sub-Divisions), तहसीलों, उप-तहसीलों, विकास खंडों (Development Blocks) तथा विभिन्न विभागों के अन्य मंडलों के पुनर्गठन, नए निर्माण, विलय या विभाजन के लिए एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन किया गया है।
आयोग की संरचना
आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का चयन प्रशासनिक व न्यायिक अनुभवों को ध्यान में रखते हुए किया गया है:
1.  अध्यक्ष: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री धर्म चंद चौधरी।
2.  सदस्य: श्री विशाल पंवार (अधिवक्ता)।
3.  सदस्य: श्री राजेश शर्मा, आईएफएस (सेवानिवृत्त)।
4.  सदस्य सचिव: निदेशक, भू-अभिलेख विभाग (Department of Land Records), हिमाचल प्रदेश


इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय और विशेषज्ञ सलाह सुनिश्चित करने के लिए राजस्व, वित्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन, लोक निर्माण विभाग (PWD), जल शक्ति तथा सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक सचिवों को आयोग की बैठकों में विशेष आमंत्रित (Special Invitees) के रूप में शामिल किया जाएगा।

 
आयोग के मुख्य कार्य और नियम शर्तें (Terms of Reference)
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत आयोग को निम्नलिखित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
1 : वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा: हिमाचल प्रदेश में मौजूद सभी जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उप-तहसीलों, ब्लॉक और विभागीय कार्यालयों के मौजूदा ढांचे का गहन अध्ययन करना।

2:  पुनर्गठन की आवश्यकता का आकलन: जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, आवाजाही/पहुंच, प्रशासनिक दक्षता और जनसुविधा को आधार बनाते हुए नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, विलय, विभाजन या पुनर्गठन की सिफारिश करना।

3 : हितधारकों से परामर्श: अपनी सिफारिशें तैयार करते समय आयोग आम जनता के प्रतिनिधियों, विभिन्न हितधारकों और संबंधित विभागों से सीधा विचार-विमर्श करेगा।

4 : वित्तीय प्रभाव का मूल्यांकन: नई प्रशासनिक इकाइयों की स्थापना के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और जनशक्ति (Manpower) पर आने वाले संभावित खर्च का अनुमान लगाना।

5 :संसाधनों का इष्टतम उपयोग: राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना मौजूदा कार्यालयों को अधिक व्यवस्थित और सुचारू बनाने के उपाय सुझाना।

आयोग का कार्यकाल, मुख्यालय और प्रशासनिक सुविधाएं

1 : समय-सीमा: इस आयोग का कार्यकाल अधिसूचना जारी होने की तिथि से छह महीने का होगा। आयोग को इस निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और स्पष्ट सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी।
2 : मुख्यालय: आयोग का मुख्यालय शिमला में रहेगा


 प्रशासनिक सहयोग: राजस्व विभाग तथा संबंधित जिलों के उपायुक्त (Deputy Commissioners) आयोग को आवश्यक लिपिकीय सहायता, सरकारी रिकॉर्ड और जनसांख्यिकी (Demographic) डेटा उपलब्ध कराएंगे।


1 : सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की भूमिका: जीएडी द्वारा आयोग को कार्यालय स्थान, मंत्रालयिक स्टाफ (Ministerial Staff), गाड़ियां और अन्य सभी आवश्यक लॉजिस्टिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

2 : अध्यक्ष व सदस्यों की सुविधाएं: आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को उनके समकक्ष पद के अधिकारियों के अनुसार यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता (TA/DA) तथा आधिकारिक वाहन मिलेगा। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय (Honorarium) प्रदान किया जाएगा।

यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत के आदेश से जारी की गई है और इसकी प्रतियां सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। सरकार के इस कदम से दूरदराज के क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं को लोगों के घर-द्वार तक पहुंचाने और प्रशासनिक कामकाज को अधिक पारदर्शी व सुलभ बनाने की उम्मीद है।

शेयर करें:

ये भी पढ़ें

और देखें →